बवासीर का लेजर इलाज रोहिणी, दिल्ली में — Dr. Sushil Goyal से जानें सब कुछ

बवासीर के लक्षण, दर्जे, और इलाज विकल्पों की जानकारी

बवासीर एक ऐसी तकलीफ़ है जिसे लोग अक्सर महीनों — कभी-कभी सालों — तक चुपचाप सहते रहते हैं। शर्म की वजह से डॉक्टर के पास जाने में देरी होती है। घरेलू नुस्खे आज़माए जाते हैं, दवा या क्रीम ली जाती है, और यह सोचकर इंतज़ार किया जाता है कि “अपने आप ठीक हो जाएगा।”

कभी-कभी हल्की बवासीर ठीक भी हो जाती है। लेकिन अगर खून आना, दर्द, या सूजन हफ़्तों से बनी हुई है — तो शायद यह सही समय है किसी अच्छे डॉक्टर से मिलने का।

अगर आप रोहिणी, पीतमपुरा, शालीमार बाग, या उत्तर-पश्चिम दिल्ली में रहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। डॉ. सुशील गोयल, MBBS, FCGP — जो 1989 से रोहिणी में बवासीर का इलाज कर रहे हैं — यहाँ आपको सब कुछ सरल हिंदी में बता रहे हैं।

बवासीर क्या होती है? — सरल भाषा में समझें

बवासीर के लक्षण, दर्जे, और इलाज विकल्पों की जानकारी

बवासीर को आयुर्वेद में “अर्श” और कई लोग “मूलव्याध” भी कहते हैं। दो तरह की बवासीर होती है:

खूनी बवासीर (Internal Haemorrhoids): जब गुदा के अंदर नसें फूल जाती हैं। इसमें दर्द कम होता है, लेकिन मल त्याग के समय खून आता है — कपड़े पर, टिश्यू पर, या टॉयलेट में।

बादी बवासीर (External Haemorrhoids): जब गुदा के बाहर की तरफ़ नसें फूलती हैं। इसमें दर्द ज़्यादा होता है — बैठने में तकलीफ़, जलन, और कभी-कभी एक गाँठ जैसा महसूस होता है।

दोनों में एक बात समान है: जितनी जल्दी इलाज होगा, उतना आसान और सस्ता होगा।

बवासीर के लक्षण — कैसे पहचानें?

इन लक्षणों में से कोई भी हो तो बवासीर हो सकती है:

  • मल त्याग के वक्त खून आना — चाहे दर्द हो या न हो
  • गुदा के पास सूजन या गाँठ जो दबाने पर दर्द करे
  • खुजली या जलन गुदा के आसपास
  • मल त्याग के दौरान या बाद में दर्द
  • ऐसा महसूस होना कि मल पूरा नहीं निकला
  • गुदा के बाहर कुछ निकला हुआ लगना

अगर इनमें से एक या अधिक लक्षण दो हफ़्ते से ज़्यादा समय से हों, तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें — एक बार जाँच ज़रूर करवाएँ।

बवासीर के दर्जे — Grade I से Grade IV

बवासीर के लेजर इलाज, IRC, और सर्जरी के विकल्पों की जानकारी

Grade I: खून आता है लेकिन गाँठ अंदर ही रहती है।

Grade II: मल त्याग के वक्त गाँठ बाहर आती है लेकिन अपने आप वापस चली जाती है।

Grade III: गाँठ बाहर आती है और उसे हाथ से अंदर करना पड़ता है।

Grade IV: गाँठ हमेशा बाहर रहती है, अंदर नहीं जाती।

ज़रूरी बात: दर्जा तभी पता चलता है जब डॉक्टर जाँच करें। दर्जे के बिना कोई भी इलाज तय नहीं किया जा सकता।

रोहिणी में बवासीर का इलाज — क्या-क्या विकल्प हैं?

1. घरेलू देखभाल और दवाइयाँ

हल्की बवासीर के लिए सबसे पहले यही कोशिश की जाती है: fibre-rich diet, पानी, गर्म पानी से सिट्ज़ बाथ, और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयाँ।

2. IRC — बिना सुई, बिना बेहोशी

IRC एक छोटी सी प्रक्रिया है जो Grade I और Grade II की खूनी बवासीर के लिए बहुत कारगर है। इसमें infrared probe से गाँठ की रक्त आपूर्ति बंद होती है और वह सूखकर गिर जाती है।

लाभ: कोई सुई नहीं, कोई बेहोशी नहीं, 10 मिनट में हो जाता है, और उसी दिन घर जा सकते हैं।

खर्च: ₹30,000–₹35,000।

3. लेजर इलाज — Grade II और III के लिए

रोहिणी में बवासीर का लेजर इलाज अब बहुत आसान हो गया है। यह एक Day-Care प्रक्रिया है — यानी सुबह आए, इलाज हुआ, शाम को घर।

एक बारीक लेजर फाइबर को गाँठ के अंदर डाला जाता है। लेजर की रोशनी गाँठ को अंदर से सुखा देती है। न कोई कटाई होती है, न टाँके।

फायदे: दर्द बहुत कम, कोई कट नहीं, कोई टाँका नहीं, और ज़्यादातर मरीज़ 1–2 दिन में काम पर वापस जा सकते हैं।

खर्च: ₹50,000–₹60,000 (सब कुछ शामिल)।

4. Advanced Laser Treatment — Grade III और IV के लिए

Grade III या IV के लिए examination के बाद laser treatment की suitability और पूरा treatment plan बताया जाता है।

खर्च: ₹50,000–₹60,000 (सब कुछ शामिल)।

क्या बवासीर का इलाज बिना ऑपरेशन के हो सकता है?

हाँ — ज़्यादातर मरीज़ों में। Grade I और Grade II की बवासीर में IRC या लेजर इलाज से काम हो जाता है — बिना किसी ऑपरेशन के। Grade III में भी लेजर (LHP) अक्सर काफी होता है।

सिर्फ Grade IV या जटिल मामलों में ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ती है। यही वजह है कि जल्दी डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है — जितना जल्दी जाएंगे, उतना आसान और कम महंगा इलाज होगा।

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कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ?

कुछ लक्षणों में देरी नहीं करनी चाहिए:

  • ज़्यादा खून आ रहा हो
  • बहुत तेज़ दर्द हो जो रुक न रहा हो
  • गाँठ के पास सूजन हो और बुखार भी हो
  • 2 हफ़्ते से ज़्यादा घरेलू इलाज के बाद भी कोई फ़र्क नहीं
  • खून के साथ पस या बदबूदार डिस्चार्ज हो

याद रखें: गुदा से खून आना सिर्फ़ बवासीर की वजह से नहीं होता। फिशर, भगंदर, और कुछ गंभीर बीमारियाँ भी ऐसे लक्षण दे सकती हैं।

डॉ. सुशील गोयल — रोहिणी के सबसे अनुभवी पाइल्स विशेषज्ञ

37 साल का अनुभव। 1 लाख से ज़्यादा मरीज़। Global Excellence Award 2019 — उत्तर भारत का सर्वश्रेष्ठ लेजर सेंटर।

डॉ. सुशील गोयल, MBBS, FCGP — हिंदू राव हॉस्पिटल, दिल्ली के पूर्व हाउस सर्जन — 1989 से रोहिणी में बवासीर, फिशर, भगंदर और pilonidal sinus का इलाज कर रहे हैं।

हर मरीज़ की जाँच और इलाज डॉ. गोयल खुद करते हैं — कोई जूनियर डॉक्टर नहीं, कोई बदलाव नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्र: बवासीर का इलाज कितने में होता है रोहिणी में?
उ: IRC treatment ₹30,000–₹35,000 और laser treatment ₹50,000–₹60,000 के बीच है।

प्र: क्या लेजर इलाज में दर्द होता है?
उ: प्रक्रिया के दौरान कोई दर्द नहीं होता; बाद में हल्की तकलीफ़ हो सकती है जो दवा से ठीक हो जाती है।

प्र: बवासीर का इलाज के बाद वापस आ सकती है?
उ: अगर खान-पान और जीवनशैली में बदलाव न किया जाए तो बवासीर वापस आ सकती है।

प्र: क्या insurance से इलाज का पैसा मिल सकता है?
उ: Insurance coverage आपकी policy और treatment पर निर्भर करती है। TPA से पहले confirm करें।

अगला कदम — आज ही अपॉइंटमेंट लें

बवासीर की तकलीफ़ में हर दिन की देरी Grade बढ़ाती है और इलाज महँगा करती है। गोयल पाइल्स केयर सेंटर में डॉ. सुशील गोयल आपकी जाँच करेंगे, Grade बताएंगे, और इलाज के सभी विकल्प समझाएंगे — उसके बाद आप तय करें।

📍 D-12/182, पहली मंज़िल, सेक्टर 8, रोहिणी, दिल्ली – 110085
रोहिणी ईस्ट मेट्रो स्टेशन गेट 2 के पास | मेट्रो पिलर नं. 393 के सामने
📞 Call या WhatsApp: +91-9999333166

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यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह चिकित्सीय सलाह नहीं है। कृपया किसी योग्य डॉक्टर से मिलकर अपनी समस्या की जाँच करवाएँ।

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